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चलो कराएं अपने बच्चों की सब्ज़ियों और उनके गुणों से दोस्ती इस गीत के साथ
Aaloo bola Mujhko khalo
Main tumko mota kar doonga Palak boli Mujhko khalo
Main tumko taakat de doongi
Gobi matar tamatar bole, Gaajar bhindi baingan bole
Agar hume bhi khaoge to jaldi bade ho jaoge Gaajar bola Mujhko khalo
Main tumko vitamins doonga
Bhindi boli Mujhko khalo
Main tumko healthy kar doongi
Gobi matar tamatar bole, Gaajar bhindi baingan bole
Agar hume bhi khaoge to jaldi bade ho jaoge.
एक जंगल में एक खरगोश रहता था। वह बहुत ही डरपोक था। कहीं जरा-सी भी
आवाज सुनाई पड़ती तो वह डरकर भागने लगता। डर के मारे वह हर वक्त अपने कान
खड़े रखता। इसलिए वह कभी सुख से सो नहीं पाता था।
एक दिन खरगोश एक आम के पेड़ के नीचे सो रहा था। तभी पेड़ से एक आम उसके
पास आकर गिरा। आम गिरने की अवाज सुनकर वह हड़बड़ा कर उठा और उछलकर दूर जा
खडा हुआ। "भागो! भागो! आसमान गिर रहा है।" चिल्लाता हुआ सरपट भागने लगा।
रास्ते में उसे एक हिरन मिला। हिरन ने उससे पूछा, "अरे भाई तुम इस तरह
भाग क्यों रहे हो? आखिर मामला क्या है? खरगोश ने कहा, अरे भाग, भाग! जल्दी
भाग! आसमान गिर रहा है। हिरन भी डरपोक था। इसलिए वह भी भयभीत होकर उसके साथ
भागने लगा। भागते-भागते दोनो जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, "भागो! भागो!
आसमान गिर रहा है।श"
उनकी देखादेखी डर के मारे जिराफ, भेडि़या, लोमडी, गीदड़, तथा अन्य
जानवरों का झुंड भी उनके साथ भागने लगा। सभी भागते-भागते एक साथ चिल्लाते
जा रहे थे, भागो! भागो! आसमान गिर रहा है। उस समय सिंह अपनी गुफा में सो
रहा था। जानवरो का शोर सुनकर वह हडबड़ाकर जाग उठा। गुफा से बाहर आया, तो
उसे बहुत क्रोध आया। उसने दहाड़ते हुए कहा, रूको! रूको! आखिर क्या बात है?
सिंह के डर से सभी जानवर रूक गए। सबने एक स्वर मे कहा, "आसमान नीचे गिर रहा है।"
यह सुनकर सिंह को बड़ी हँसी आई। हँसते-हँसते उसकी आँखो में आँसू आ गए।
उसने अपनी हँसी रोककर कहा, "आसमान को गिरते हुए किसने देखा है?" सब
एक-दूसरे का मुँह ताकने लगे। अंत में सभी की निगाह खरगोश की ओर मुड़ गई तभी
उसके मुँह से निकला, "आसमान का एक टुकड़ा तो उस आम के पेड़ के नीचे ही
गिरा है।"
"अच्छा चलो, हम वहाँ चलकर देखते हैं।" सिंह ने कहा।
सिंह के साथ जानवरों की पूरी पलटन आम के पेड़ के पास पहुँची सबने
इधर-उधर तलाश की। किसी को आसमान का कोई टुकड़ा कहीं नजर नही आया। हाँ, एक
आम जरूर उन्हे जमीन पर गिरा हुआ दिखाई दिया।
सिंह ने आम की ओर इशारा करते हुए खरगोश से पूछा, "यही है, आसमान का टुकड़ा, जिसके लिए तुमने सबको भयभीत कर दिया?"
अब खरगोश को अपनी भूल समझ में आई। उसका सिर शर्म से झुक गया। वह डर के मारे थर-थर काँपने लगा।
दूसरे जानवर भी इस घटना से बहुत शार्मिंदा हुए। वे अपनी गलती पर पछता रहे थे कि सुनी-सुनाई बात से डरकर वे बेकार ही भाग रहे थे।
शिक्षा - सुनी-सुनाई बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
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किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी जो बहुत ही धूर्त और चालाक थी। जंगल के छोटे मोटे जानवरों को वह अपनी मीठी बातों में फंसा कर उन पर शिकार करने का प्रयत्न करती। कभी-कभी तो उसकी चालाकी समझकर कुछ जानवर भाग निकलते और कभी कभी कुछ बेचारे उसका शिकार बनते।
एक दिन गधा कहीं से घूमता फिरता उस जंगल में पहुंचा। लोमड़ी ने सोचा कि कहीं ऐसा न हो यह गधा जंगल के छोटे मोटे जानवरों को मेरी चालाकियां समझा दे, तो हम कहीं के भी नहीं रहेंगे। अतः उसने सोचा कि क्यों न गधा से भी दोस्ती का हाथ बढ़ा कर फिर उस का शिकार कर दिया जाय। वह बहुत ही विनम्र भाव में बोली, कि भाई तुम्हारा नाम क्या है, और कहाँ से और किस प्रयोजन से यहाँ आना हुआ।
गधे ने अपना परिचय बता दिया। लोमड़ी ने कहा कि बड़ा अच्छा हुआ तुम आ गए अब हम तुम एक मित्र की भांति रहेंगे। गधा बिचारा सीधा सादा था उसे छल प्रपंच की बातें आती नहीं थी वह क्या समझता कि लोमड़ी के मन में क्या पक रहा है। एक दिन लोमड़ी कुछ उदास हो कर बैठी। गधे ने उसे चिन्तित देखा तो पूछा लोमड़ी बहन! तुम इतनी उदास क्यों हो। लोमड़ी ने और भी उदास मुद्रा बनाकर कहा क्या बताऊं भाई! मैंने एक पाप किया है उसी की याद करके मुझे पश्चाताप हो रहा है। लोमड़ी ने आंखों में आंसू भरकर कहा – कुछ दिन पहले मैं और मेरा लोमड़ सुख से रहते थे, एक दिन हम दोनों में एक बात को लेकर बड़ी जोर से झगड़ा हो गया। लोमड़ क्रोध में घर से बाहर निकल गया कुछ देर तो मैं घर में रही। मैंने सोचा कि क्रोध शांत होने पर लोमड़ घर लौट आएगा किंतु वह तो नहीं लौटा लेकिन शेर की दहाड़ सुनाई पड़ने लगी। मैं भाग कर गई कि कहीं शेर मेरे लोमड़ को मार न डाले। किंतु मेरे जाते जाते शेर मेरे लोमड़ का शिकार कर चुका था। मुझे भी घर जाने की इच्छा नहीं हुई तब से मैं यहीं पड़ी रहती हूं। इतना कहकर लोमड़ी रोने लगी। मैं यही सोचती हूं कि मैंने लड़ाई क्यों की। गधे ने उसकी बातों पर विश्वास कर लिया और बोला मत दुखी हो बहन ! गल्ती हो ही जाया करती है। तुमने जान बूझ कर तो कुछ किया नहीं | लोमड़ी ने कहा – भाई तुमने भी कोई पाप किया है कभी तो मुझे बताओ। गधे ने कहा – हां बहन ! एक बार मुझसे भी गल्ती हो गई थी। मैं भी एक धोबी का नौकर था। धोबी रोज कपड़ों की लादी मुझ पर लादता था। और घर से घाट और घाट से घर ले जाया करता था.| उसके एवज में मुझे घांस पानी मिलता था। एक दिन धोबी के लड़के ने मुझ पर लादी लाद दी और खुद भी बैठकर चला घात की ओर। उस दिन मेरी इच्छा चलने की नहीं हो रही थी। मैं अड़ गया। लड़के ने पुचकारा किंतु मई अड़ा रहा वह गुस्से में उतर कर मुझे मारने चला। मैंने वह पैर फटकारा कि उसकी लादी भी गिर गई। और उसे भी चोट आ गई और मैं वहां से चल दिया . मैं भी यही सोचता हूं कि मैंने वह गल्ती क्यों की। लोमड़ी ने गुस्से में भर के कहा नमकहराम जिसका खाता रहा उसी का काम करने में आनाकानी की तेरी शक्ल भी देखना पाप है। कह कर वह झपटने को हुई। पहले तो गधा यह न समझ पाया कि लोमड़ी क्यों एक दम बदल गई। वह रेंकता हुआ भागा लोमड़ी ने उसका पीछा किया। गधे का रेंकना सुनकर जंगल के और जानवर आए। जब लोमड़ी और उसको भागते देखा तो यह कहते हुए भागे कि अरे ! आज लोमड़ी ने अपने लोमड़ की मनगढ़ंत कहानी सुना कर गधे को अपना शिकार बना लिया। गधे का क्या हुआ यह तो याद नहीं है किंतु लोमड़ी पर से सभी जानवरों का विश्वास उठ गया। वह एक अकेली और निरीह सी घूमने लगी। कहानी समझने की है |
शिक्षा - झूठ बोलकर धोखा दिया जा सकता है किंतु यदि झूठ खुल गया तो उस पर से सब का विश्वास सदा के लिए उठ जाता है।
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बहुत समय पहले किसी गाँव में सुन्दर नाम का एक आदमी रहता था। सुन्दर एक बहुत अच्छा चित्र्कार था। जब एक दिन खाना बनाने के लिए सुन्दर जंगल में लकड़ियाँ काटने जा रहा था। तभी उसकी नज़र एक चमकदार चीज़ पर पड़ी और बोला, “ये इतनी चमकदार चीज़ क्या है?” यह सोचकर सुन्दर उस चमकदार चीज़ के पास गया, और उसने उस चमकने वाली चीज़ को उठाकर बोला, “अरे ! यह तो बस एक पेंसिल हैं। पर ये इतनी चमक क्यों रही है?”
सुन्दर थोड़ी देर उस चमकने वाली पेंसिल को निहारता रहा। तभी उसे याद आया की उसे खाना बनाने के लिए लकड़ियाँ काटने जाना था। वह उस पेंसिल को अपने साथ लेकर वहाँ से चला गया। जब सुन्दर शाम को घर आया तो उसने देखा की अभी भी उस पेंसिल की चमक वैसे की वैसे ही थी।
सुन्दर ने उस पेंसिल का इस्तेमाल किया, और उस पेंसिल से उसने चित्र्कारी करना शुरू कर दिया। सबसे पहले उसने एक सेब बनाया, और जैसे ही उस कागज़ पर सेब बन गया वह सेब उसकी आँखों के सामने असलियत में आ गया। जिसे देखकर सुन्दर एक दम हक्का-बक्का रह गया। उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था, फिर उसने दोबारा उस पेंसिल से एक कुल्हाड़ी बनाई। वह कुल्हाड़ी भी उसके सामने प्रकट हो गयी। सुन्दर को यकीन हो गया था, की यह एक जादुई पेंसिल है।
उस पेंसिल को पाकर सुन्दर बहुत खुश हो गया था। अब उस पेंसिल के ज़रिये सुन्दर ने अपनी ज़रूरतों का सारा सामान बना लिया था । ऐसे ही करते-करते अब उसके पास हर एशो आराम की चीज़े थीं, जिसके बाद वह आराम का जीवन बिताने लगा। तभी एक दिन सुन्दर ने सोचा, “मैंने तो अपनी ज़रुरत की सारी चीज़े पा ली, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होंगे जो अपनी ज़रूरतें पूरी नहीं कर पाते होंगे। क्यों ना मैं उनकी मदद करूँ !”
सुन्दर यह सोच ही रहा था की तभी उसे याद आया की उसका एक दोस्त, जो दूसरे गाँव में रहता हैं। जिसके पिताजी का स्वास्थ्य बहुत ख़राब रहता हैं। सुन्दर ने सोचा, “क्यों ना मैं अपने दोस्त की मदद कर दू।” सुन्दर अगली सुबह अपने दोस्त सोहन से मिलने चला गया। वो दोनों एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश हुए।
सुन्दर ने अपने दोस्त सोहन को भरोसा दिलाने के लिए उस जादुई पेंसिल से एक आम बनाया, और वह आम उन लोगो के सामने आ गया। यह देखकर सोहन हैरान रह गया था। उसके बाद, सुन्दर सोहन की मदद करने लगा। सोहन की ज़रूरतों का सारा सामान उस पेंसिल के ज़रिये बना दिया। और उसकी मदद करके वहाँ से चला गया।
धीरे-धीरे कर के सुन्दर हर उस इंसान की जरूरते पूरी करता था, जिसे मदद की जरूरत होती थी। ऐसा करते-करते वो पूरे गाँव में मशहूर हो गया। एक दिन गाँव के कुछ लोग सुन्दर की जादुई पेंसिल के बारे में आपस में बात कर रहे थे की तभी वहाँ खड़े हुए एक आदमी ने सब कुछ सुन लिया और उसने सोचा, “अरे वाह ! ये जादुई पेंसिल अगर मुझे मिल जाए तो मैं अमीर हो जाऊँगा।”
एक दिन किसी काम से सुन्दर कही जा रहा था। तभी उस आदमी ने सुन्दर का अपहरण कर लिया। वो सुन्दर को अपने घर ले गया। उस आदमी ने सुंदर से सोने का पहाड़ बनाने को कहा। सुन्दर ने एक सोने का पहाड़ बना दिया, लेकिन उसने पहाड़ के साथ-साथ एक बहुत लंबी नहर भी बनाई। पहाड़ देखकर वो आदमी बहुत खुश हो गया, और उसने सुन्दर से उसकी जादुई पेंसिल छीन ली। जैसे ही वो नाव की तरफ जा रहा था उससे जादुई पेंसिल गिर गई। पर वो आदमी इतना खुश था की उसे कुछ पता नहीं चला लेकिन सुन्दर ने वो जादुई पेंसिल गिरते हुए देख ली। जैसे ही वो आदमी नहर के बीच में पहुंचा, सुन्दर ने जल्दी से पेंसिल उठाई और नहर में लंबी-लंबी लहरों को बना दिया। और वो आदमी लहरों में बह गया।
तो इस तरह सुन्दर ने अपनी जादुई पेंसिल को गलत हाथों में जाने से बचा लिया।
शिक्षा - अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके बड़ी से बड़ी मुसीबतों से निकला जा सकता है।
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